11 साल की मासूम सोनिया पर है पूरे परिवार का भार, पिता और बड़ी बहनों के साथ हुआ है कुछ ऐसा कि जानकर सहम जाएंगे आप

बचपन में आपने भी अपने भाई- बहनों और दोस्तों के साथ छिपम- छिपाई तो जरूर खेली होगी। ये खेल हर किसी के बचपन से जुड़ा होता है। लेकिन इस दुनिया में कई बचपन ऐसे भी हैं, जिन्हें ये खेल खेलने के लिए बंद आंखों की जरुरत नहीं पड़ती। उन्हें तो खुली आंखों से भी सिर्फ अंधेरा ही नजर आता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं झारखंड में रहने वाली सोनिया के परिवार की। जिसमें परिवार के चार सदस्यों में से 3 सदस्य इस खूबसूरत दुनिया को देख नहीं सकते  और परिवार की सबसे छोटी और चौथी सदस्य सोनिया परिवारवालों की देखरेख करती है।

घाटशिला के गालुडीह इलाके की रहने वाली 11 साल की सोनिया मुंडा के कंधे पर पूरे परिवार का भार है। सोनिया बचपन से ही अपनी दो बड़ी अंधी बहनों और पिता की देखभाल कर रही है। खाना बनाने से लेकर परिवार चलाने तक का काम मासूम सोनिया खुद करती है। 11 साल की सोनिया एक- दो नहीं बल्कि पिछले 7 सालों से अपने पिता और बहनों की देखभाल कर रही है। सोनिया बताती है कि वो सिर्फ 4 साल की थी, जब उसकी मां की मौत हो गई। अब तो उसके पास उसकी मां की केवल हल्की सी यादें ही बची है। उसे ये भी नहीं मालूम कि उसकी मां की मौत कैसे हुई और ना ही ये बात उसके पिता को मालूम है।सोनिया बताती है कि वैसे भी अब तो उसके पास ये सब सोचने का वक्त ही नहीं होता।

सोनिया सुबह अपने पिता और बहनों को मुंह- हाथ धुलाने से लेकर खाना- बनाना, झाडू- बर्तन हर काम खुद ही करती है। सोनिया कहती है कि इस बीत वक्त कम बीत जाता है, इसका पता ही नहीं चलता। काम के बीच- बीच ये लोग हमेशा बुलाते भी रहते हैं, तो उसे उनकी भी सुननी पड़ती है। सोनिया ने कहा कि कभी- कभी तो वो इनकी बातों से बहुत ज्यादा गुस्सा भी हो जाती है, और उन्हें डांट भी देती है। लेकिन बाद में उसे पछतावा भी होता है, क्योंकि उसके अलावा इनका इस दुनिया में और कौन है।

सोनिया के घर में पानी की सुविधा नहीं है, इसलिए उसे थोड़ी दूर जाकर पानी लाना पड़ता है। इसके लिए पहले तो वो खुद ही बार- बार कुएं तक जाकर पानी लाती थी। लेकिन ज्यादा वक्त लगने और थकान की वजह से अब सोनिया के पिता और बहनें भी उसकी मदद ले लिए जाते हैं। सोनिया सभी को हाथ पकड़कर ले जाती है और पानी भरकर सभी वैसे ही वापस भी आ जाते हैं।

पिता भुनू मुंडा और बड़ी बहन नाची मुंडा के नाम से पेंशन मिलता है,जिससे सोनिया घर चलाती है। गांववालों ने बताया कि इलाज के लिये वे इन्हें सरकारी अस्पताल गये थे, लेकिन वहां आंख ठीक नहीं होने की बात कहकर लौटा दिया गया। मंझली बहन शुरुवाली मुंडा को धुंधला दिखाई देता है, लेकिन पैसों की कमी से ये लोग उसका इलाज नहीं करवा सकते। इतना ही नहीं सोनिया को खुद भी दिन में तो सबकुछ ठीक नजर आता है, लेकिन रात में उसे भी धुंधला दिखाई देता है। चौबीसों घंटे अंधेरे में डूबे इस घर के लिए सोनिया किसी श्रवण कुमार से कम नहीं है।