इस एक कमेंट ने मजबूत किए थे शालिनी अग्निहोत्री के इरादे, अपनी मेहनत के दम पर IPS बनी बस कंडक्टर की बेटी

अगर जीवन में सफलता की सीढ़ियां चढ़नी हैं तो मेहनत और जूनून से पहले एक सपना देखना होगा. सपना कुछ बनने का जिसमे जज्बा हो. आज की कहानी एक ऐसी लड़की है जिसने बचपन में ही सपना देख लिया था कि जब बड़ी होगी तो पुलिस में जाकर देश की सेवा करेगी. सपना पूरा हो गया है। यही लड़की आगे जाकर IPS ऑफिसर बन गई. अब शालिनी को सबसे बेस्ट आईपीएस ट्रेनी के लिए चुना गया है|

एसपी शालिनी अग्निहोत्री हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना की रहने वाली हैं। शालिनी का जन्म 14 जनवरी 1989 को मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। शालिनी की मां शुभलता और पिता रमेश एक बस कंडक्टर थे। शालिनी बताती हैं कि बचपन में एक दिन शालिनी और उसकी मां बस में सफर कर रहे थे। जिस सीट पर वो बैठे थे, उसके ठीक पीछे एक आदमी खड़ा था जो उनकी सीट को हाथ से पकड़े हुआ था। शालिनी की मां को थोड़ा अटपटा लग रहा था. उन्होंने उसे हाथ हटाने के लिए बोला. आदमी ढीठ, वहीं हाथ रख खड़ा रहा. जब उन्होंने दुबारा बोला तो वो आदमी गुस्सा हो गया. बोला: “तुम डीसी हो क्या जो तुम्हारी बात मैं सुनूंगा?”

तैश में बोली गई इस बात ने शालिनी की ज़िंदगी बदल दी|शालिनी कहती हैं कि उस घटना के समय वो बहुत छोटी थी और उन्हें डीसी का मतलब पता नहीं था, लेकिन इतना ठान लिया था कि मुझे भी  कुछ ऐसा ही बड़ा बनना है। शालिनी का कहना है कि उस व्यक्ति की एक बात ने मेरी जिंदगी बदल दी। बचपन से ही पढ़ाई में मेहनती रही शालिनी ने आखिरकार कड़ी मेहनत और लगन से साल 2012 में अपना आईपीएस अफसर बनने का सपना पूरा किया। जिस दौरान शालिनी को बेस्ट ट्रेनी के खिताब से भी नवाजा गया।

हिमाचल के ऊना के दूरदराज थाटहाल गांव  की आईपीएस अधिकारी शालिनी अग्निहोत्री एक ऐसा नाम है जो ना केवल सभी के लिए एक मिसाल है बल्कि अपराधियों का काल भी है। इनके काम करने का ढंग ऐसा है की नाम से ही न’शे के कारोबारी घबराते हैं। कुल्लू में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने न’शे के सौदागरों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया था।

शालिनी एक मामूली बस कंडक्टर की बेटी हैं। शालिनी के पिता रमेश कुमार अग्निहोत्री धर्मशाला में एचआरटीसी में कंडक्टर हैं, जबकि माता शुभलता घर संभालती हैं। शालिनी का बचपन किराए के मकान में गुजरा। शालिनी अपनी मेहनत और लगन के दम पर ना केवल आईपीएस अधिकारी बनी बल्कि ट्रेनिंग (65वां बैच) के दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ ट्रेनी का खिताब से भी नवाजा गया। सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर ट्रेनी आफिसर होने के कारण उन्हें देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा सम्मानित भी किया गया है। अपनी उपलब्धियों के चलते वह राष्ट्रपति की मौजूदगी में हुए पासिंग आउट परेड में आकर्षण का केन्द्र रहीं।

बचपन से ही शालिनी को अधिकारी बनने का शौक था। एक अधिकारी बनने के बाद शालिनी ने कहा कि लड़कियों को खूब पढ़ाओ। अब लड़कियां लड़कों से किसी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। लड़कियां लड़कों से आगे निकल रही हैं। हम दो बहनें और एक भाई हैं। बड़ी बहन डॉक्टर है, जबकि छोटा भाई इंडियन आर्मी में है। बस्ती जिले के एसपी संकल्प शर्मा से बीते पांच मार्च को शालिनी की शादी हुई। शालिनी ने एक बार कहा था कि मेरे पापा भले ही बस कंडक्टर थे, लेकिन मेरी मम्मी घर के कामों के साथ हमारा पूरा ध्यान रखती थी।

शालिनी ने 18 महीने की तैयारी के बाद मई 2011 में यूपीएससी की परीक्षा दी। ट्रेनिंग के दौरान 148 के बैच में शालिनी को अव्वल स्थान मिला। वह यूपीएससी में सफलता हासिल करने के लिए रात को तीन बजे तक पढ़ती थी। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें उनकी पहली पोस्टिंग हिमाचल में हुई। जब उन्होंने कुल्लू में पुलिस अधीक्षक का पदभार संभाला तो अप’राधियों में द’हशत हो गई थी।