अगर आप ने कभी भी दान में दिए हैं पैसे ,तो इस बात का रखें सबसे ज्यादा ख्याल वरना नहीं होगा कोई फ़ायदा

कहते हैं इस दुनिया में अगर आप पुण्य कमाना चाहते हैं तो दान से अच्छा पुण्य कुछ नहीं हो सकता है। अगर आप से जाने अनजाने में कोई पाप हो गया है, और आप उस का प्रायश्चित करना चाहते हैं तो शास्त्रों के हिसाब से दान करने से पाप का प्रायश्चित हो जाता है। इस तरीके से आप पुण्य कमाते हैं और जरुरतमंद लोगों को उनकी जरूरत की चीजें मिल जाती है। परंतु ध्यान देने वाली बात यह है कि दान करते समय हमें क्या नहीं करना चाहिए।

 

1. अगर आप किसी को कोई भी ध्यान दे रहे हैं तो एक बात का ध्यान हमेशा रखें, कि उस दान में आपके पूरे परिवार की खुशी शामिल होना जरूरी है। अगर आप अपनी पत्नी, पुत्र और परिवार को दुखी करके दान करते हैं तो आपको कोई पुण्य नहीं प्राप्त होगा।

2. अगर आप जरूरतमंद के घर जा कर दान करे,तो सबसे अच्छा होता है बजाय इसके कि आप उसे घर बुला कर दान कर रहे हैं।

3. अगर कोई भी इंसान गाय,रोगी या ब्राह्मणों को दान कर रहा है तो उसे कभी भी यह न कहे कि यह दान ना करें। वर्ना वह पाप का भागी बन सकता है।

4. जब भी आप किसी को दान करें तो हमेशा अपने हाथ में तिल, कुश और चावल जरूर ले और इसी का दान करें। ऐसा दान करने से भगवान को प्राप्त होता है वरना दैत्यों को प्राप्त हो जाता है।

5. जब भी आप किसी को दान करें तो आप का मुंह हमेशा पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए और जिसे आप दान कर रहे हैं यानी कि दान लेने वाले का मुख हमेशा उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए। ऐसा करने से दान देने वाले और लेने वाले दोनों की आयु में वृद्धि होती है।

6. अगर आप पितर देवता को दान दे रहे हैं तो तिल के साथ दान दे और अगर आप देवताओं को दान दे रहे हैं तो चावल के साथ दान दे।

7. जो भी मनुष्य अपनी जिंदगी में कमा रहा है उसमें से उसे हमेशा अपना दसवां भाग किसी शुभ काम में लगा देना चाहिए या फिर किसी गौशाला में या जरूरतमंद व्यक्ति को दान दे देना चाहिए।

8 कई लोग गौ दान करना चाहते हैं परंतु गो दान नहीं कर पाते हैं। तो ऐसे में उन्हें हमेशा रोगी की सेवा करना चाहिए या फिर देवताओं का पूजन करना चाहिए या हमेशा पुंय देने वाले का कार्य में अपने पैसे को लगाना चाहिए।

 

9. जो भी आप दान निर्धन, अनाथ, गूंगे या विकलांगों या फिर किसी भी जरूरतमंद की सेवा में लगाते हैं। उससे आपको बहुत पुंय प्राप्त होता है।

 

10. सबसे बड़ी बात यह है कि जो ब्राह्मण विद्याहीन हो उसे कभी भी दान ग्रहण नहीं करना चाहिए। वरना उसको जिंदगी भर नुकसान सहना पड़ता है।