मर्दों को भी गुजरना पड़ता था पीरियड्स के दर्द से, जरूर पढ़े ये चौकाने वाली खबर

 

अक्सर महिलाएं इस बात की चर्चा आपस में करती नज़र आती हैं की ईश्वर ने मासिक धर्म की पीड़ा से गुजरने की तकलीफ केवल महिलाओं के नसीब में ही क्यों लिखा। कभी किसी मर्द को क्यों आज तक मासिक धर्म नहीं हुआ या क्यों उन्हें इस पीड़ा से कभी नहीं गुजरना पड़ता है। सुनने में विचित्र जरूर लगेगा लेकिन आज हम आपको जो बताने जा रहे हैं उसे सुनके आप हैरान जरूर हो उठेंगे। पहले के ज़माने में ऐसा कहा जाता है की मर्दों को भी इस पीड़ा से होकर गुजरना पड़ता था। आईये जानते हैं की आखिर ये कैसे संभव था

मासिक धर्म का सम्बन्ध केवल महिलाओं से ही नहीं बल्कि पुरुषों से भी है

आपको जानकर अचम्भा जरूर होगा लेकिन हिन्दू पौराणिक धर्मशास्त्रों में ऐसा लिखा है की मासिक धर्म का सम्बन्ध स्त्री और पुरुष दोनों से ही है। आपको बता दें संसार को बनाने के समय केवल देवता ही हुआ करते थे ब्रह्मा, विष्णु और महेश। शिव जी ने ब्रह्मा जी को सृस्टि के रचना का जिम्मा सौंपा था और ब्रह्मा जी ने अपने तप के बल पर कुल आठ संतानो को जन्म दिया था। पहले संतान को जन्म देने का कार्य पुरुषों का ही था और उन्हें रजस्वला यानि की मासिक धर्म से भी गुजरना पड़ता था। ब्रह्मा जी ने इसी प्रकार अन्य देवताओं समेत नारद मुनि का भी रचना किया था लेकिन कुछ समय बाद जब शिव जी को ऐसा लगने लगा की ब्रह्मा जी से संसार की सृष्टि का कार्य भली भाँती नहीं हो पा रहा है तो उन्होनें अर्धनारीश्वर रूप लिया और पृथ्वी पर स्त्री की रचना की।

इस तरह से शुरु हुआ था महिलाओं का मासिक धर्म

महिलाओं में मासिक धर्म नहीं होता शुरू अगर पार्वती जी जिद ना करती। एक पौराणिक कथा का अनुसार स्त्रियों के नए के बाद भी संतान रचना की जिम्मेदारी पहले पुरुषों की होती थी लेकिन एक दिन पार्वती जी ने शिव जी से जिद की उन्हें पुरुषों के वस्त्र पर लाल छींटें बहुत भाते हैं और उन्हें भी ऐसे वस्त्र चाहिए। शिव जी ने उन्हें समझाने की लाख कोशिश की ये रजस्वला का परिणाम होता है लकिन वो नहीं मानी हारकर शिव जी को पार्वती जी के हैट के आगे झुकना पड़ा और उन्होनें फैसला किया की अबसे पुरुष नहीं बल्कि स्त्रियां रजस्वला होंगी और संतान की उत्पत्ति भी उन्हें ही करनी पड़ेगी तब से आजतक स्त्रियों को मासिक धर्म के पीड़ा से गुजरना पड़ता है।